पंजाब के सरकारी कर्मचारियों के लिए हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: डीए (DA) बकाए पर रोक लगाने से इनकार, मान सरकार की रिव्यू याचिका खारिज करते हुए 25 मई तक मांगा भुगतान का पूरा शेड्यूल

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पंजाब के सरकारी कर्मचारियों के लिए हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: डीए (DA) बकाए पर रोक लगाने से इनकार, मान सरकार की रिव्यू याचिका खारिज करते हुए 25 मई तक मांगा भुगतान का पूरा शेड्यूल
Chandigarh
Jaspreet Singh | May 21, 2026
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पंजाब के लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट की ओर से एक बहुत ही बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। हाईकोर्ट की डबल बेंच ने राज्य सरकार को करारा झटका देते हुए कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (डी.ए.) के बकाए के भुगतान के खिलाफ दायर की गई पंजाब सरकार की रिव्यू याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। अदालत ने सिंगल बेंच के उस फैसले पर स्टे (रोक) लगाने से साफ इनकार कर दिया है, जिसमें सभी सरकारी कर्मचारियों को आईएएस (IAS), आईपीएस (IPS), आईएफएस (IFS) और न्यायिक अधिकारियों के समान 58% की दर से डीए जारी करने के आदेश दिए गए थे। हाईकोर्ट ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए पंजाब सरकार को निर्देश दिए हैं कि वह 25 मई 2026 तक अदालत में एक पूरा लिक्विडेशन शेड्यूल (योजना) पेश करे, जिसमें यह साफ-साफ़ बताया जाए कि सरकार कर्मचारियों के डीए का बकाया किस तरह और कब तक अदा करेगी।

इससे पहले माननीय जस्टिस हरप्रीत सिंह बरार की सिंगल बेंच ने पंजाब सरकार को 30 जून 2026 तक सभी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बकाए को क्लियर करने की समय-सीमा दी थी। पंजाब सरकार ने वित्तीय तंगी का हवाला देते हुए इस फैसले के खिलाफ अपील दायर की थी, जिसे डबल बेंच ने स्वीकार नहीं किया। अदालत ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) कोई खैरात या सरकार का अहसान नहीं है, बल्कि यह कर्मचारियों का एक कानूनी अधिकार है। हाईकोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि जब महंगाई का असर सभी कर्मचारियों पर बराबर पड़ता है, तो डीए के मामले में वरिष्ठ अधिकारियों और निचले स्तर के कर्मचारियों के बीच किसी भी तरह का भेदभाव संविधान के आर्टिकल 14 (समानता के अधिकार) का उल्लंघन है।

इस फैसले के बाद पंजाब के विभिन्न कर्मचारी संगठनों में खुशी की लहर दौड़ गई है और उन्होंने इसे कर्मचारी वर्ग की एक बड़ी ऐतिहासिक जीत बताया है। दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने भी इस फैसले का स्वागत करते हुए मान सरकार पर निशाना साधा है कि सरकार को कर्मचारियों के हक के पैसे रोकने के बजाय अदालत के आदेशों के अनुसार तुरंत भुगतान करना चाहिए। अब सभी की निगाहें 25 मई की अगली सुनवाई पर टिकी हुई हैं, जहां पंजाब सरकार को अदालत के सामने फंड जारी करने का लिखित खाका पेश करना होगा।

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पंजाब के सरकारी कर्मचारियों के लिए हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: डीए (DA) बकाए पर रोक लगाने से इनकार, मान सरकार की रिव्यू याचिका खारिज करते हुए 25 मई तक मांगा भुगतान का पूरा शेड्यूल

पंजाब के लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट की ओर से एक बहुत ही बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। हाईकोर्ट की डबल बेंच ने राज्य सरकार को करारा झटका देते हुए कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (डी.ए.) के बकाए के भुगतान के खिलाफ दायर की गई पंजाब सरकार की रिव्यू याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। अदालत ने सिंगल बेंच के उस फैसले पर स्टे (रोक) लगाने से साफ इनकार कर दिया है, जिसमें सभी सरकारी कर्मचारियों को आईएएस (IAS), आईपीएस (IPS), आईएफएस (IFS) और न्यायिक अधिकारियों के समान 58% की दर से डीए जारी करने के आदेश दिए गए थे। हाईकोर्ट ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए पंजाब सरकार को निर्देश दिए हैं कि वह 25 मई 2026 तक अदालत में एक पूरा लिक्विडेशन शेड्यूल (योजना) पेश करे, जिसमें यह साफ-साफ़ बताया जाए कि सरकार कर्मचारियों के डीए का बकाया किस तरह और कब तक अदा करेगी। इससे पहले माननीय जस्टिस हरप्रीत सिंह बरार की सिंगल बेंच ने पंजाब सरकार को 30 जून 2026 तक सभी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बकाए को क्लियर करने की समय-सीमा दी थी। पंजाब सरकार ने वित्तीय तंगी का हवाला देते हुए इस फैसले के खिलाफ अपील दायर की थी, जिसे डबल बेंच ने स्वीकार नहीं किया। अदालत ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) कोई खैरात या सरकार का अहसान नहीं है, बल्कि यह कर्मचारियों का एक कानूनी अधिकार है। हाईकोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि जब महंगाई का असर सभी कर्मचारियों पर बराबर पड़ता है, तो डीए के मामले में वरिष्ठ अधिकारियों और निचले स्तर के कर्मचारियों के बीच किसी भी तरह का भेदभाव संविधान के आर्टिकल 14 (समानता के अधिकार) का उल्लंघन है। इस फैसले के बाद पंजाब के विभिन्न कर्मचारी संगठनों में खुशी की लहर दौड़ गई है और उन्होंने इसे कर्मचारी वर्ग की एक बड़ी ऐतिहासिक जीत बताया है। दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने भी इस फैसले का स्वागत करते हुए मान सरकार पर निशाना साधा है कि सरकार को कर्मचारियों के हक के पैसे रोकने के बजाय अदालत के आदेशों के अनुसार तुरंत भुगतान करना चाहिए। अब सभी की निगाहें 25 मई की अगली सुनवाई पर टिकी हुई हैं, जहां पंजाब सरकार को अदालत के सामने फंड जारी करने का लिखित खाका पेश करना होगा।

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