
देश-विदेश की सिख संगत की भावनाओं और पंथक एकता को ध्यान में रखकर बनाया गया अकाली दल ‘वारिस पंजाब दे’ और शिरोमणि अकाली दल (पुनर्सुरजीत) के बीच का गठबंधन महज 29 दिनों के भीतर ही आधिकारिक तौर पर टूट गया है। दोनों पक्षों के बीच पंथक एकता को आगे बढ़ाने के लिए बनाई गई 8 सदस्यीय “पंथक एकता समन्वय समिति” की कई दौर की बैठकों के बाद भी कुछ अहम सैद्धांतिक मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी, जिसके कारण यह तालमेल पूरी तरह खत्म हो गया है। ‘वारिस पंजाब दे’ संगठन की चार सदस्यीय समिति के नेताओं—बाबू सिंह बराड़, भाई परमजीत सिंह जौहल, भाई प्रगट सिंह रईया और भाई रछपाल सिंह सोसन—ने अमृतसर से साझा बयान जारी करके इस गठबंधन के खत्म होने की आधिकारिक पुष्टि की है।
गठबंधन टूटने का मुख्य कारण नेतृत्व की विश्वसनीयता और वैचारिक मतभेद बताए जा रहे हैं। ‘वारिस पंजाब दे’ के नेताओं के अनुसार, श्री अकाल तख्त साहिब के हुक्मनामे के आलोक में यह तय हुआ था कि पंथ के नेतृत्व का नैतिक आधार खो चुके नेताओं को अलग रखा जाएगा, लेकिन दूसरे गुट द्वारा ऐसे विवादित चेहरों को दोबारा अहम और प्रतिष्ठित पद दे दिए गए, जिससे एकता की बुनियाद कमजोर हो गई। इसके अलावा, दूसरे पक्ष द्वारा की गई कथित गैर-जिम्मेदाराना बयानबाजी ने आपसी विश्वास को भारी ठेस पहुंचाई है। हालांकि, ‘वारिस पंजाब दे’ ने स्पष्ट किया है कि साफ-सुथरे, ईमानदार और पंथ स्वीकृत नेताओं के लिए उनके दरवाजे हमेशा खुले रहेंगे, लेकिन इस अचानक हुए अलगाव ने पंजाब की पंथक राजनीति में एक नया सियासी भूचाल ला दिया है।
अकाली दल ‘वारिस पंजाब दे’ और ‘पुनर्सुरजीत’ के बीच गठबंधन टूटने से पंजाब की राजनीति में बड़ा फेरबदल
